मंत्रविज्ञान और आयुर्वेद के क्षेत्र में करणीय कुछ पल्लवन प्रो. वृषभ प्रसाद जैन इधर ये तथ्य बहु-संख्या में प्रकाश में आने लगे हैं या प्रकाश में आ रहे हैं कि आज की बहु-प्रचलित चिकित्सा-पद्धति एलोपैथी, जिसे वैज्ञानिक आधार पर खड़ी चिकित्सा पद्धति समझा जा रहा है या माना जा रहा है , में बहुत सारे प्रसंगों में एंटीबायोटिक्स एक स्थिति में काम करना बंद कर देती हैं और रोगी लाइलाज या असाध्य-जैसी स्थिति में पहुँच जाता है या रोगी का जैसे-जैसे इलाज किया जाता है , वैसे-वैसे ही उसके रोग घटने की बजाय बढ़ने लगते हैं. एक रोग ठीक नहीं हो पाता , तब तक दूसरे रोग-और उसके शरीर में उभर आते हैं और एक स्थिति तब आती है , जब चिकित्सक ही कह देता है कि अब बीमारी लाइलाज हो गई या इलाज नहीं किया जा सकता या जब औषधि का प्रयोग किया जाता है , तो औषधि काम नहीं करती , ऐसे में रोगी और उसके तीमारदार बेचारे क्या करें ?...... कुछेक प्रसंगों में यह भी देखा गया है कि हम एक अंग का इलाज करते हैं और बाद में पता चलता है कि इस अंग में तो मूल बीमारी थी ही नहीं तथा मूल बीमारी कहीं और थी और इलाज हमने मूल बी...
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